वादों - इरादों के साथ आम नेताओं की जमात में सिद्धू !
कांग्रेस
पार्टी में शामिल हो कर सिद्धू ने कहा कि वह अपनी 'जड़' यानी कांग्रेस में
लौट आये हैं। कांग्रेस में लौटते ही वे बीजेपी की तीखी आलोचना करने लगे।
उसी बीजेपी की जिसकी जड़ को वे अब तक सींचते आ रहे थे। हमने सुना है ...
सिद्धू हमेशा नैतिकता की बातें करते हैं और एक से एक शेरो - शायरी के जरिए
आम जन को प्रभावित करते रहते हैं। उनकी बातें सुन ऐसा ही लगता है कि वे आम
नेताओं से थोड़े अलग हैं। उनकी राजनीति नि:स्वार्थ है और वे देश के लिए
वाकई कुछ करना चाहते हैं। शायद बीजेपी में रहकर उन्हें कुछ करने का मौका
नहीं मिला। लेकिन अब कांग्रेस में शामिल हो वे अपने प्रदेश का कायाकल्प
करने की बातें करने लगे हैं।
कांग्रेस में रहकर सिद्धू को पंजाब के लिए हकीकत में कितना कुछ करने का मौका मिल पायेगा यह तो चुनाव के बाद के वर्षों में पता चलेगा। मगर अभी वे पंजाब चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी को मन भर कोसेंगे और वर्तमान सरकार की खामियां निकालेंगे ताकि सत्ता से बाहर उनकी पार्टी पंजाब में सरकार बना सके।
अफसोस है कि अब सिद्धू आम नेताओं की जमात में शामिल हो गये हैं। आम इसलिए क्योंकि आज कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्होंने ढेर सारी बातें की और कई सारे वादे इरादे जाहिर किये। उनकी इन्हीं कई बातों में एक बात थी कि पंजाब की दुर्दशा पर फिल्में बनने लगी हैं। हां, वे 'उड़ता पंजाब' की बातें कर रहे थे। पंजाब के नौजवान ड्रग्स की चपेट में हैं। उनका भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है...उनका इशारा इसी ओर था।
सवाल उठता है कि इतना सुलझा हुआ इंसान बीजेपी में रहकर इतने वर्षों से खुद को धोखे में क्यों रखे हुए था वो भी तब , जब उन्हें यह मालूम था कि उनकी 'जड़' कांग्रेस पार्टी में हैं । वे खुद को धोखा तो दे ही रहे थे साथ ही जनता को भी अंधकार में रखे हुए थे।
अपने बेबाक बोल से लोगों में ऊर्जा भर देने वाले सिद्धू को बीजेपी छोड़ने के बाद कांग्रेस में शामिल होने के लिए महीनों क्यों लग गए ? क्या वे इन खबरों को झुठला सकते हैं कि वे 'आप' पार्टी में अवसर तलाश रहे थे ? क्या वे इसे झुठला सकते हैं कि उनकी बनायी पार्टी 'आवाज-ए- पंजाब' से उनके राजनीतिक कैरियर को लाभ नहीं मिलने वाला था।
दरअसल, उनके पास कोई विकल्प था ही नहीं। 'बीजेपी' को उन्होंने छोड़ ही दिया था, 'आप' में दाल गलती नहीं दिख रही थी, लिहाजा ले देकर उनके पास मात्र 'कांग्रेस' पार्टी ही थी, जिसमें वो शामिल हो सकते। उधर, कांग्रेस को भी दरकार थी एक अच्छे वक्ता की । सो बात बन गई...दरअसल कांग्रेस ने सिद्धू की लाज रख ली।
एमपी रहे सिद्धू को विधानसभा चुनाव लड़ने का भी मौका मिलनेवाला है। बहुत संभव है कि वे एमएलए का चुनाव जीत भी लें। मगर क्या पंजाब कांग्रेस के अंदर उनके विरोधी उन्हें पंजाब की राजनीति में पांव जमाने देंगे? क्या उन्हें कोई ऐसी कुर्सी मिलेगी जिसके बल पर वे पंजाब के उन नौजवानों का उद्धार कर सकें जो 'ड्रग्स' के आगोश में समाए हुए हैं। उम्मीद की जा सकती है कि सिद्धू ऐसा कर पाएं। उनके इस नेक काम में कोई रोड़ा नहीं बने। वैसे न भी कर पाए तो कोई गल नहीं जी...क्योंकि सिद्दू पा जी के लिए तो हंसी-ठिठोली-ठहाकों का दरवाजा खुला है ही !
रातों रात कैसे किसी का हृदय परिवर्तन हो सकता है कि उसकी विचारधारा ही
बदल जाए ! कैसे कोई बीजेपी से कांग्रेस में , कांग्रेस से सपा में , सपा से
बीएसपी में और बीएसपी से बीजेपी में शामिल होकर उसकी विचारधारा का अनुसरण
करने लग सकता है ? इस हृदय परिवर्तन के नवीनतम उदाहरण बीजेपी छोड़
कांग्रेस का दामन थाम लेनेवाले नवजोत सिंह सिद्धू हैं।
कांग्रेस
पार्टी में शामिल हो कर सिद्धू ने कहा कि वह अपनी 'जड़' यानी कांग्रेस में
लौट आये हैं। कांग्रेस में लौटते ही वे बीजेपी की तीखी आलोचना करने लगे।
उसी बीजेपी की जिसकी जड़ को वे अब तक सींचते आ रहे थे। हमने सुना है ...
सिद्धू हमेशा नैतिकता की बातें करते हैं और एक से एक शेरो - शायरी के जरिए
आम जन को प्रभावित करते रहते हैं। उनकी बातें सुन ऐसा ही लगता है कि वे आम
नेताओं से थोड़े अलग हैं। उनकी राजनीति नि:स्वार्थ है और वे देश के लिए
वाकई कुछ करना चाहते हैं। शायद बीजेपी में रहकर उन्हें कुछ करने का मौका
नहीं मिला। लेकिन अब कांग्रेस में शामिल हो वे अपने प्रदेश का कायाकल्प
करने की बातें करने लगे हैं।कांग्रेस में रहकर सिद्धू को पंजाब के लिए हकीकत में कितना कुछ करने का मौका मिल पायेगा यह तो चुनाव के बाद के वर्षों में पता चलेगा। मगर अभी वे पंजाब चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी को मन भर कोसेंगे और वर्तमान सरकार की खामियां निकालेंगे ताकि सत्ता से बाहर उनकी पार्टी पंजाब में सरकार बना सके।
अफसोस है कि अब सिद्धू आम नेताओं की जमात में शामिल हो गये हैं। आम इसलिए क्योंकि आज कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्होंने ढेर सारी बातें की और कई सारे वादे इरादे जाहिर किये। उनकी इन्हीं कई बातों में एक बात थी कि पंजाब की दुर्दशा पर फिल्में बनने लगी हैं। हां, वे 'उड़ता पंजाब' की बातें कर रहे थे। पंजाब के नौजवान ड्रग्स की चपेट में हैं। उनका भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है...उनका इशारा इसी ओर था।
सवाल उठता है कि इतना सुलझा हुआ इंसान बीजेपी में रहकर इतने वर्षों से खुद को धोखे में क्यों रखे हुए था वो भी तब , जब उन्हें यह मालूम था कि उनकी 'जड़' कांग्रेस पार्टी में हैं । वे खुद को धोखा तो दे ही रहे थे साथ ही जनता को भी अंधकार में रखे हुए थे।
अपने बेबाक बोल से लोगों में ऊर्जा भर देने वाले सिद्धू को बीजेपी छोड़ने के बाद कांग्रेस में शामिल होने के लिए महीनों क्यों लग गए ? क्या वे इन खबरों को झुठला सकते हैं कि वे 'आप' पार्टी में अवसर तलाश रहे थे ? क्या वे इसे झुठला सकते हैं कि उनकी बनायी पार्टी 'आवाज-ए- पंजाब' से उनके राजनीतिक कैरियर को लाभ नहीं मिलने वाला था।
दरअसल, उनके पास कोई विकल्प था ही नहीं। 'बीजेपी' को उन्होंने छोड़ ही दिया था, 'आप' में दाल गलती नहीं दिख रही थी, लिहाजा ले देकर उनके पास मात्र 'कांग्रेस' पार्टी ही थी, जिसमें वो शामिल हो सकते। उधर, कांग्रेस को भी दरकार थी एक अच्छे वक्ता की । सो बात बन गई...दरअसल कांग्रेस ने सिद्धू की लाज रख ली।
एमपी रहे सिद्धू को विधानसभा चुनाव लड़ने का भी मौका मिलनेवाला है। बहुत संभव है कि वे एमएलए का चुनाव जीत भी लें। मगर क्या पंजाब कांग्रेस के अंदर उनके विरोधी उन्हें पंजाब की राजनीति में पांव जमाने देंगे? क्या उन्हें कोई ऐसी कुर्सी मिलेगी जिसके बल पर वे पंजाब के उन नौजवानों का उद्धार कर सकें जो 'ड्रग्स' के आगोश में समाए हुए हैं। उम्मीद की जा सकती है कि सिद्धू ऐसा कर पाएं। उनके इस नेक काम में कोई रोड़ा नहीं बने। वैसे न भी कर पाए तो कोई गल नहीं जी...क्योंकि सिद्दू पा जी के लिए तो हंसी-ठिठोली-ठहाकों का दरवाजा खुला है ही !
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